UP Revenue Code Section 24 Paimayish & Partition Disputes
Comprehensive guide on UP Revenue Code Section 24 demarcation (paimayish) and kurra partition disputes in Prayagraj Board of Revenue and High Court.
विवाद का स्वरूप और विधिक स्थिति (Core Legal Problem & Statutory Framework)
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 (UP Revenue Code 2006) की धारा 24 कृषि भूमि की पैमाइश (Demarcation of Boundaries) और धारा 116 सह-खातेदारों के बीच जोतों के बटवारे (Partition of Holdings) से संबंधित है। जब किसी गाールの (Plot) की मेड़बंदी, कब्जा परिवर्तन या उत्तराधिकार व आपसी बटवारे के बाद कुर्रा (Kurra - Share Allocation) बनाने में विवाद उत्पन्न होता है, तो पीड़ित पक्षकार को उपजिलाधिकारी (SDM) या तहसीलदार (Tehsildar) के न्यायालय में वाद योजित करना होता है। यदि पैमाइश आदेश के बाद राजस्व निरीक्षक (Revenue Inspector / Kanungo) की रिपोर्ट में धांधली हो या बोर्ड ऑफ राजस्व (Board of Revenue, UP at Prayagraj) तथा कमिश्नर स्तर पर अपीलीय आदेश में त्रुटि हो, तो मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) के समक्ष अनुच्छेद 226/227 के अंतर्गत रिट याचिका (Writ Petition) के दायरे में आता है।
इस प्रकार के मामलों में तात्कालिक कानूनी कदम यह है कि विवादित भूमि के नवीनतम खसरा-खतौनी (Record of Rights), सजरा (Map/Cadastral Plan), और मौके की स्थिति का मिलान किया जाए। स्टाम्प पेपर और नियत प्रक्रिया के बिना अनधिकृत कब्जे को हटाने या मनमाने तरीके से सीमांकन कराने के प्रयासों के खिलाफ तत्काल सिविल कोर्ट या राजस्व न्यायालय में अंतरिम निषेधाज्ञा (Interim Injunction) या सीमांकन आदेश के विरुद्ध निगरानी (Revision) दाखिल करनी पड़ती है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट व कचहरी की जमीनी हकीकत (Ground Reality, Hidden Truth & Procedural Pitfalls)
प्रयागराज जिला कचहरी के राजस्व न्यायालयों (Tehsildar and SDM Courts) से लेकर राजस्व परिषद (Board of Revenue, MG Marg, Prayagraj) तक पैमाइश और बटवारे के मुकदमों में भारी विलंब एक आम जमीनी हकीकत है। धारा 24 के तहत सीमांकन के आदेश पारित होने के बावजूद लेखपाल और कानूनगो स्तर पर मौके पर पत्थर गड़ी (Boundary Pillars) स्थापित करने में महीनों या वर्षों लग जाते हैं। इसके पीछे स्थानीय राजनीतिक हस्तक्षेप, गलत पैमाइश रिपोर्ट और राजस्व कर्मचारियों की उदासीनता मुख्य कारण हैं।
अक्सर देखा गया है कि विपक्षीगण पैमाइश की प्रक्रिया को उलझाने के लिए झूठे स्थगन प्रार्थना पत्र (Stay Applications) दाखिल करते हैं। वहीं, बोर्ड ऑफ राजस्व में मुकदमों की अत्यधिक संख्या के कारण तारीख पर तारीख मिलने की प्रवृत्ति आम है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ और मुख्य पीठ (Prayagraj) में ऐसे मामलों में तब तक हस्तक्षेप नहीं किया जाता जब तक कि निचली अदालत के आदेश में कोई स्पष्ट अधिकारिता त्रुटि (Jurisdictional Error) या नैसर्गिक न्याय (Principles of Natural Justice) का उल्लंघन न हो। इसलिए, रिट याचिका दाखिल करते समय यह साबित करना अनिवार्य होता है कि राजस्व प्राधिकारियों ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली (UP Revenue Code Rules) के प्रावधानों का खुला उल्लंघन किया है।
चरणबद्ध कानूनी प्रक्रिया और कार्ययोजना (Step-by-Step Procedural Roadmap & Action Plan)
उत्तराधिकार या सह-खातेदारों के बीच बटवारे और सीमांकन विवाद के समाधान के लिए निम्नलिखित चरणबद्ध कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए:
- आवेदन एवं वाद प्रस्तुतीकरण (Filing of Application): धारा 24 के अंतर्गत पैमाइश हेतु तहसीलदार के समक्ष निर्धारित प्रारूप पर आवेदन, और धारा 116 के अंतर्गत बटवारे हेतु उपजिलाधिकारी (SDM) के न्यायालय में वाद दाखिल करना।
- सत्यापन एवं रिपोर्ट (Verification & Spot Inspection): राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) द्वारा पक्षकारों की उपस्थिति में मौके की पैमाइश और नजरी नक्शा (Spot Map) तैयार करना।
- आपत्ति दाखिल करना (Filing Objections): पैमाइश रिपोर्ट या प्रस्तावित कुर्रे के विरुद्ध 15 दिनों के भीतर अपनी लिखित आपत्ति (Objection) प्रस्तुत करना और जिरह करना।
- अपील व निगरानी (Appeals & Revisions): एसडीएम या तहसीलदार के आदेश के विरुद्ध अपर कलेक्टर (Additional Collector) या कमिश्नर के यहां अपील, और अंततः राजस्व परिषद (Board of Revenue Prayagraj) में निगरानी (Revision) दाखिल करना।
- इलाहाबाद हाईकोर्ट रिट (High Court Writ Petition): यदि राजस्व बोर्ड या अधीनस्थ न्यायालयों के आदेश मनमाने या विधिक प्रावधानों के विपरीत हों, तो संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करना।
आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य जुटाने की रणनीति (Essential Documents, Evidence & Filing Checklist)
राजस्व वाद और उच्च न्यायालय में रिट दाखिल करने के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों का संकलन आवश्यक है:
- वर्तमान वित्तीय वर्ष की प्रमाणित खतौनी (Certified Copy of Khatauni) एवं खसरा।
- चकबंदी नक्शा या मौजे का मूल सजरा (Original Cadastral Map with tracing).
- तहसीलदार/कानूनगो द्वारा तैयार की गई पैमाइश रिपोर्ट, क्षेत्र-पुस्तक (Field Book) और नजरी नक्शा।
- पूर्ववर्ती आदेशों की प्रमाणित प्रतियां (Certified copies of orders passed by SDM, Commissioner, or Board of Revenue).
- मौके की स्थिति दर्शाने वाले स्पष्ट फोटोग्राफ या वीडियोग्राफी (डिजिटल साक्ष्य भारतीय साक्ष्य अधिनियम - BSA के प्रावधानों के अनुरूप)।
- पक्षकारों के मध्य पारिवारिक समझौता या वंशावली (Genealogical Tree / Vanshavali) यदि बटवारा विरासत से जुड़ा हो।
अदालती खर्चे, वकालत फीस और पारदर्शी व्यवस्था (Litigation Costs, Advocate Fees & Transparency)
प्रयागराज कचहरी और इलाहाबाद हाईकोर्ट में राजस्व मुकदमों की वित्तीय संरचना मामलों की जटिलता पर निर्भर करती है:
- ड्राफ्टिंग एवं फाइलिंग शुल्क (Drafting & Filing Fees): धारा 24 या 116 के प्रारंभिक वाद, आपत्तियां, और अपील-निगरानी के लिए ड्राफ्टिंग शुल्क वाद के आकार और पन्नों की संख्या के आधार पर तय होता है।
- अदालती फीस व स्टाम्प (Court Fees & Stamps): उत्तर प्रदेश कोर्ट फीस एक्ट के अनुसार निर्धारित न्यूनतम वाद मूल्य और प्रशासनिक स्टाम्प शुल्क। उच्च न्यायालय में रिट याचिका हेतु निर्धारित उच्च न्यायालय कल्याण टिकट (High Court Welfare Stamp) अनिवार्य हैं।
- वकील की फीस का प्रारूप (Advocate Fee Bifurcation): स्टेज-वाइज फीस (प्रत्येक तारीख या सुनवाई पर) या संपूर्ण मुकदमे कामुश्त पैकेज (Lumpsum Package)। इसमें मुंशी खर्च (Clerkage), टाइपिंग, और नकल उतरवाने के खर्च शामिल होते हैं।
- पारदर्शिता की शर्त: वकालतनामा (Vakalatnama) निष्पादित करते समय मु मुवक्किल को यह स्पष्ट कर लेना चाहिए कि देय फीस में अंतरिम स्थगन प्रार्थना पत्र (Stay Extension), संशोधन अर्जी (Amendment Application) और दस्ती नोटिस सेवा के खर्चे सम्मिलित हैं या नहीं। हमेशा लिखित रसीद (Written Receipt) की मांग करें।
- निःशुल्क विधिक सहायता: पात्र और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के किसान व नागरिक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA Prayagraj) या इलाहाबाद हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति (HCLSC) के माध्यम से मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
Frequently Asked Questions
1. यदि कानूनगो ने बिना पक्षकारों को नोटिस दिए एकतरफा पैमाइश रिपोर्ट दाखिल कर दी है, तो क्या उपाय है?
ऐसी पैमाइश रिपोर्ट कानून की नजर में शून्य (Void) है। आप तहसीलदार न्यायालय के समक्ष पैमाइश रिपोर्ट की पुष्टि (Confirmation) से पहले लिखित आपत्ति दाखिल कर सकते हैं कि नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत (Audi Alteram Partem) का उल्लंघन किया गया है। यदि आदेश पारित हो चुका है, तो उपजिलाधिकारी के समक्ष अपील या निगरानी दायर की जा सकती है।
2. बोर्ड ऑफ राजस्व (Board of Revenue, Prayagraj) में लंबित मुकदमों में तेजी लाने के लिए क्या किया जा सकता है?
बोर्ड ऑफ राजस्व में मुकदमों की अधिकता के कारण सामान्य तिथियां लंबी मिलती हैं। यदि मामले में कब्जा छिनने या गंभीर क्षति की आपात स्थिति हो, तो स्टे एप्लीकेशन (Stay Application) के साथ अर्जी अतिशीघ्र सुनवाई (Early Hearing / Urgency Application) दाखिल करके मामले को प्राथमिकता पर सुनाया जा सकता है।
3. क्या राजस्व न्यायालय के सीमांकन आदेश के खिलाफ सीधे इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की जा सकती है?
सामान्यतः हाईकोर्ट सीधे हस्तक्षेप नहीं करता जब तक कि वैधानिक वैकल्पिक उपाय (Statutory Alternative Remedies) जैसे अपील या निगरानी का विकल्प उपलब्ध न हो। हालांकि, यदि आदेश पूर्णतः अधिकार क्षेत्र से बाहर (Without Jurisdiction) हो या मौलिक अधिकारों का हनन करता हो, तो अनुच्छेद 226/227 के तहत रिट स्वीकार की जा सकती है।
4. धारा 116 के तहत कुर्रा बटवारे में सह-खातेदार जानबूझकर सहयोग नहीं कर रहे हैं, कोर्ट कैसे फैसला करती है?
यदि सह-खातेदार सहयोग नहीं करते, तो न्यायालय अमीन कमिश्नर (Ameen Commissioner) नियुक्त करता है जो मौके का निरीक्षण कर निष्पक्ष कुर्रे (Equitable Shares) का प्रस्ताव तैयार करता है। न्यायालय उसी अमीन रिपोर्ट के आधार पर अंतिम डिग्री (Final Decree) पारित करता है, जिसके विरुद्ध आपत्ति का अवसर सबको मिलता है।
5. पैमाइश के दौरान मौके पर पुलिस बल की मांग कैसे की जाती है?
यदि पैमाइश के समय स्थानीय विरोध या शांति भंग होने की आशंका (Apprehension of Breach of Peace) हो, तो उपजिलाधिकारी या तहसीलदार के माध्यम से संबंधित थाने को निर्देशित कराया जाता है कि पैमाइश के वक्त पुलिस फोर्स उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए प्रार्थना पत्र के साथ आवश्यक प्रशासनिक शुल्क और आवेदन देना होता है।
